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BNS Section 61, IPC Section 120A आपराधिक षड्यंत्र | बीएनएस धारा 61

नमस्कार दोस्तों, आज हम पढ़ेंगे की भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय 4 की धारा 61 के बारे में एवं पूर्ण जानकारी देंगे कि यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 क्या कहती है और इसका क्या अभिप्राय है? जब कि यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता 120A हुआ करती थी। साथ ही हम आपको बी एन एस की धारा 61 के अंतर्गत इसमें (आपराधिक षड्यंत्र) की परिभाषा इत्यादि की जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
[BNS Section 61 in Hindi]
Law Dharavahik 
द्वारा विवरण 
आपराधिक षड्यंत्र की परिभाषा

आपराधिक षड्यंत्र की परिभाषा से तात्पर्य यह है कि अगर दो या उसे अधिक लोग कोई वैध समझौता करते है यानी की जो विधि के अनुकूल हो काम करते है और उसमे अवैध साधनों का उपयोग करते हैं। तो वो पहले भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 120क के खंड 03 में  होता था, पर अब यह भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61 के अंतर्गत अपराध होगा।

पुस्तक द्वारा विवरण 

जब कि दो या अधिक व्यक्ति -  
(1) कोई अवैध कार्य, अथवा 
(2) कोई ऐसा कार्य, जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा, करने या करवाने को सहमत होते हैं, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड्यंत्र कहलाती है : 

परंतु किसी अपराध को करने की सहमति के सिवाय कोई सहमति आपराधिक षड्यंत्र तब तक न होगी, जब तक कि सहमति के अलावा कोई कार्य उसके अनुसरण में उस सहमति के एक या अधिक पक्षकारों द्वारा नहीं कर दिया जाता । 

स्पष्टीकरण - यह तत्वहीन है कि अवैध कार्य ऐसी सहमति का चरम उद्देश्य है या उस उद्देश्य का आनुषंगिक मात्र है ।


[BNS Section 61 in English]

(1)When two or more persons agree to do, or cause to be done–
(a) an illegal act, or
(b) an act which is not illegal by illegal means, such an agreement is designated a criminal conspiracy.
Provided that no agreement except an agreement to commit an offence shall amount to a criminal conspiracy unless some act besides the agreement is done by one or more parties to such agreement in pursuance thereof.

Explanation:—
It is immaterial whether the illegal act is the ultimate object of such agreement, or is merely incidental to that object.
(2) Whoever is a party to a criminal conspiracy.
(a) To commit an offence punishable with death, imprisonment for life or rigorous imprisonment for a term of two years or upwards, shall, where no express provision is made in this Sanhita for the punishment of such a conspiracy, be punished in the same manner as if he had abetted such offence.
(b) Other than a criminal conspiracy to commit an offence punishable as aforesaid shall be punished with imprisonment of either description for a term not exceeding six months, or with fine or with both.

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